लखनऊ: बंथरा पुलिस पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप, जानलेवा हमले में दर्ज की ‘हल्की’ धाराएं!
बंथरा के अलंकार रिसॉर्ट में पुरानी रंजिश को लेकर 15-20 बदमाशों का तांडव; पीड़ित अंशुमान सिंह पर लाठी-डंडों से हमला, सिर में आए गंभीर टांके; आर्म्स एक्ट और लूट की धाराएं गायब होने पर कमिश्नरेट पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल।

बंथरा/लखनऊ (करण वाणी, न्यूज़)। राजधानी लखनऊ के कमिश्नरेट पुलिस क्षेत्र के थाना बंथरा इलाके में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसकी गवाही 8 जुलाई 2026 की शाम को बंथरा स्थित अलंकार रिसॉर्ट में हुई खूनी वारदात दे रही है। आरोप है कि एक पुरानी रंजिश को लेकर घात लगाए बैठे दबंगों ने एक युवक पर पिस्टल, लाठी-डंडों और ईंटों से जानलेवा हमला किया, जिसमें वह लहूलुहान हो गया। लेकिन, सबसे गंभीर सवाल अब बंथरा पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं, जिस पर सरेआम हुए इस जानलेवा हमले को साधारण मारपीट में तब्दील कर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगा है।
पिस्टल और ईंटों से किया हमला, दो गाड़ियां क्षतिग्रस्त
पीड़ित अंशुमान सिंह पुत्र वेश कुमार सिंह (निवासी पहड़ापुर, थाना बंथरा) द्वारा थाने में दी गई लिखित तहरीर के अनुसार, वह शाम लगभग 7:00 बजे अलंकार रिसॉर्ट में खड़े थे। तभी पुरानी रंजिश को लेकर घात लगाए दबंगों ने उन्हें घेर लिया।
आरोप है कि:
• मुख्य आरोपी रुद्रा यादव पुत्र छोटेलाल यादव (निवासी बंथरा गांव) ने अपने साथियों— अभिषेक यादव, मयंक यादव, अंकित यादव, और आदर्श यादव (निवासी भदस्सा)— व 5 अज्ञात लोगों के साथ “जान से मारने की नियत से” हमला कर दिया।
• तहरीर में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि रुद्रा यादव ने पिस्टल से हमला किया, जबकि उसके साथियों ने लाठी-डंडों व ईंटों से बर्बरता से प्रहार किया।
• इस खूनी हमले में अंशुमान सिंह के सिर पर गंभीर चोटें आईं और वह लहूलुहान हो गए।
• बदमाशों ने मौके पर खड़ी दो गाड़ियों, UP 32 PX 9191 और UP 32 PY 9191, को भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए।
बंथरा पुलिस पर क्यों उठ रहे हैं तीखे सवाल?
पीड़ित के आवेदन और सामने आए वीडियो-फोटोग्राफ्स के बावजूद, बंथरा पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर बेहद कमजोर प्रतीत होती है। इस ‘खेल’ से पुलिस की मंशा पर सीधे सवाल उठ रहे हैं:
1. पिस्टल का ज़िक्र गायब: आवेदन में स्पष्ट रूप से “पिस्टल से हमला” करने की बात लिखी है, लेकिन एफआईआर में आर्म्स एक्ट या गंभीर हथियार की धाराएं नदारद हैं। क्या पुलिस पिस्तौल से हमले को सामान्य मान रही है?
2. जानलेवा हमले को ‘साधारण चोट’ में बदला: सिर पर गंभीर चोट, टांके आने और ईंटों-पिस्टल से हमले के बावजूद पुलिस ने जानलेवा हमले (हत्या के प्रयास – धारा 109 BNS) के बजाय स्वेच्छा से मामूली चोट पहुंचाने (धारा 115 BNS) जैसी जमानती और हल्की धारा लगाई है।
3. गाड़ी की भयंकर तोड़फोड़ पर मामूली धारा: दो-दो गाड़ियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बावजूद पुलिस ने केवल मामूली नुकसान (मिसचीफ) की धारा 324(4) लगाई है।
जनता पूछ रही है तीखे सवाल:
आखिर बंथरा पुलिस इन नामजद अपराधियों पर इतनी मेहरबान क्यों है?
क्या लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में सरेआम पिस्तौल लहराना, गाड़ियां तोड़ना और सिर फाड़ देना एक सामान्य अपराध है?
क्या पुलिस अपराधियों को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए जानबूझकर केस को कमजोर कर रही है?
पीड़ित अंशुमान सिंह ने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है और अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। अब देखना यह होगा कि क्या लखनऊ के आला अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर बंथरा पुलिस की इस कथित ‘लापरवाही’ पर एक्शन लेते हैं और एफआईआर में हत्या के प्रयास (धारा 109 BNS) व गंभीर चोट (धारा 117 BNS) जैसी धाराएं बढ़ाते हैं या अपराधियों को यूं ही अभयदान मिलता रहेगा।



