अपराध

लखनऊ में अपराध बेलगाम, ग़ाज़ीपुर पुलिस बनी अपराधियों की रहनुमा

पत्रकार परिवार पर हमला… ग़ाज़ीपुर पुलिस क्यों बनी अपराधियों की साथी!

पंकज सिंह चौहान/करण वाणी

लखनऊ। राजधानी की सड़कों पर अपराध का नया चेहरा सामने आ रहा है। ऑटो चालकों का संगठित गिरोह अब रात के अंधेरे में राहगीरों और परिवारों को निशाना बनाने लगा है। बीती रात (20 अगस्त 2025) वरिष्ठ पत्रकार अनुपम सिंह चौहान और उनके परिवार के साथ घटी सनसनीखेज़ वारदात ने न केवल राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं।

जानकारी के मुताबिक़, पत्रकार अपनी पत्नी का गोमतीनगर स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर से MRI करवाकर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान एक ऑटो चालक ने बीच सड़क पर रास्ता रोककर बदतमीज़ी शुरू की। थोड़ी ही देर में उसके साथी भी मौके पर पहुँच गए और कार को घेरकर लूटपाट का प्रयास किया। किसी तरह परिजनों ने हिम्मत दिखाकर जान बचाई, लेकिन इस घटना ने राजधानी में सक्रिय गिरोह की पोल खोल दी है।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

इस घटना के बाद CCTV फुटेज सामने आया है, जिसने ग़ाज़ीपुर थाना पुलिस की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है। फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि जैसे ही पत्रकार चौहान अपने घर पहुँचे, उनके पीछे से एक पुलिस सिपाही अपराधी को अपनी बाइक पर बैठाकर उसी घर तक लेकर आया। यह नज़ारा इस बात की ओर इशारा करता है कि ग़ाज़ीपुर पुलिस अपराधियों के साथ मिली हुई है और सीधे तौर पर उन्हें संरक्षण दे रही है।

राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न

आम जनता की सुरक्षा को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन पत्रकार जैसे संवेदनशील वर्ग को भी निशाना बनाया जाना बेहद गंभीर मामला है। यह घटना साफ़ बताती है कि राजधानी की सड़कों पर अपराधियों का राज है और पुलिस कहीं न कहीं उनकी ढाल बनकर खड़ी है।

लोगों का कहना है कि अगर पत्रकार तक सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाज़ा सहज लगाया जा सकता है।

लखनऊ में अवैध ऑटो का खेल

• राजधानी लखनऊ में सैकड़ों की संख्या में अवैध ऑटो रिक्शा धड़ल्ले से चल रहे हैं।
• ट्रैफ़िक पुलिस और स्थानीय थाने इनसे महीनेवार वसूली करते हैं।
• परिणामस्वरूप शहर की ट्रैफ़िक व्यवस्था दिन-ब-दिन बदहाल होती जा रही है।
• यही अवैध ऑटो चालक कई बार अपराधी गतिविधियों में शामिल होकर गिरोहबाज़ी करते हैं।
• हालिया घटना ने यह साफ़ कर दिया है कि इन अवैध ऑटो पर रोक लगाने की बजाय पुलिस इन्हें संरक्षण देती है।

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