जुनाबगंज चौराहे पर ट्रैफ़िक पुलिस का आतंक, किसान, व्यापारी व आम आदमी भयभीत
जुनाबगंज चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस वाले बिना उचित कारण के वाहन चालकों को रोकते हैं और फिर उन्हें डरा धमकाकर पैसे वसूलते हैं।
पंकज सिंह चौहान/करण वाणी
लखनऊ ब्यूरो । सोले फ़िल्म में जैसे गब्बर के आतंक से किसान और गाँव वाले घर से बाहर नहीं निकलते थे वैसे ही इस टाइम जुनाबगंज चौराहे पर ट्रैफ़िक पुलिस के आतंक से किसान अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली व आम आदमी अपनी बाइक लेकर बाहर नहीं निकलता।
ट्रैफ़िक पुलिस का आतंक इस क़दर है कि व्यापारी, किसान और आम जनता भयभीत हैं, आलम यह है कि अगर किसान ट्रैक्टर ट्रॉली से कोई सामान लेकर जा रहा है तो ट्रैफ़िक पुलिस को 200 रुपये देने पड़ेंगे, वहीं अगर व्यापारी ईरिक्शा से कोई भी सामान किसी कस्टमर के यहाँ भेज रहा है तो उसके भी पैसे ट्रैफ़िक पुलिस को देने पड़ेंगे। बिना पैसे दिए आप ट्रैक्टर ट्रॉली या ई रिक्शा नहीं लेकर जा सकते।
नो एंट्री में एंट्री ले रहे भारी वाहन, पुलिस ढूंढ रही हेलमेट, ट्रैक्टर ट्रॉली व ईरिक्शा
लखनऊ कानपुर एलिवेटेड रोड निर्माण के चलते कानपुर और उन्नाव से लखनऊ की तरफ आने वाले भारी वाहन प्रतिबंधित हैं। लेकिन जुराबगंज चौराहे पर यह स्थिति बिल्कुल विपरीत है। यहाँ प्रतिबंधित जोन में धड़ल्ले से भारी वाहनों का आना-जाना जारी है। अब सवाल उठता है कि क्या ट्रैफिक पुलिस इन वाहनों पर रोक नहीं लगा पा रही है, या फिर वाहन चालकों में ट्रैफिक पुलिस का कोई खौफ नहीं है। या फिर ट्रैफिक पुलिस की सह पर नो एंट्री में एंट्री का खेल चल रहा है।
भारी वाहनों के प्रवेश की पड़ताल करण वाणी ने की तो हर रोज ऐसे वाहन लखनऊ कानपुर हाईवे पर दौड़ते हुए दिखाई दिए। बता दें कि ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने व हादसों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा लखनऊ, कानपुर रोड पर भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके लिए बाकायदा कानपुर से लखनऊ तक हर चौक चौराहे व वैरियर पर भारी वाहनों की नो एंट्री के चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं तो वहीं पुलिस कर्मी भी तैनात किए हुए है। इसके बावजूद ऐसे वाहनों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बाधित हो रही है वहीं कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड निर्माण स्थल पर किसी बड़े हादसे की भी आशंका बनी रहती है।
सूत्रों की मानें तो प्रति बैरियर ट्रैफिक पुलिस प्रति गाड़ी 500 रुपये सुविधा शुल्क वसूलती है, जिसने 500 रुपया दिए उसको नो एंट्री में एंट्री मिल जाती है। नाम न छापने की शर्त पर ट्रक मालिक बताते हैं कि नो एंट्री में आने के लिए प्रति वैरियर प्रतिगाड़ी 500 रूपए देने पड़ते हैं, उन्नाव से लखनऊ तक आने में एक गाड़ी पर 2500 रुपया खर्च होता है, जो ट्राफिक पुलिस नो एंट्री मेंएंट्री देने के लिए वसूलती है।
जुनाबगंज चौराहे से रोज सैकड़ों भारी वाहन नो एंट्री में प्रवेश करते हैं, जिसको ट्रैफ़िक पुलिस अनदेखा करती हैं, लेकिन वही अगर कोई मोटरसाइकिल या फिर किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉली य व्यापारी की कोई गाड़ी अगर दिख जाए तो उसे बिना परेशान किये ट्रैफ़िक पुलिस वाले नहीं छोड़ते हैं उनसे भी 200 से 500 रुपये वसूलते हैं।



