उत्तर प्रदेश

जानें कब और कैसे शुरू हुई गुड़िया पीटने की परंपरा, नाग पूजा से क्या है इसका कनेक्शन?

नाग पंचमी के दिन आखिर उत्तर प्रदेश के शहरों में क्यों पीटी जाती है गुड़िया? आखिर कब और कैसे शुरू हुआ गुड़िया का यह त्योहार? बहनों के द्वारा सजाई गई गुड़िया को आखिर क्यों पीटने पहुंचते हैं भाई? Gudia पीटने की रस्म और इससे जुड़ी कथा के बारे में विस्तारसे जानने के लिए पढ़ें ये लेख।

हिंदू धर्म में श्रावण मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी को नागपंचमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस पावन तिथि को नाग देवता कीपूजा के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी पर्व पर उत्तर प्रदेश के तमाम क्षेत्रों में गुड़िया का पर्व भी मनाया जाता है. नागपंचमी के दिन सर्पपूजन के साथ शाम के समय तमाम जगह पर गुड़िया की डंडे से पिटाई की जाती है. बहनों के द्वारा सजीसजाई गुड़िया को आखिर भाईलोग डंडे से क्यों पीटते हैं? गुड़िया पीटने की परंपरा के पीछे आखिर क्या वजह है? आइए गुड़िया पर्व से जुड़ी कथा और इस परंपरा केबारे में विस्तार से जानते हैं।

गुड़िया की क्यों होती है पिटाई

नागपंचमी के पर्व पर उत्तर प्रदेश के तमाम गांवों, कस्बों और शहरों में हर साल गुड़िया का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. इस पर्वको मनाने के लिए बहनें कई दिनों पहले से ही अपनी गुड़िया तैयार करना शुरु कर देती हैं. अमूमन तमाम लड़कियां पुराने कपड़े से बनीगुड़िया को तैयार करके उसे चौराहे या तालाब आदि के पास रख आती हैं, जिसे बाद वहां पर एकत्रित उनके भाई और दूसरे बच्चे डंडे सेपीटते हैं।

नाग देवता से जुड़ी है कथा

खूबसूरत से दिखने वाली इस गुड़िया की पिटाई के पीछे एक कथा आती है, जिसके अनुसार एक प्राचीन काल में एक महादेव नाम कालड़का नाग देवता का अनन्य भक्त था. जो प्रतिदिन किसी शिवालय में जाकर भगवान शिव के साथ नाग देवता की विशेष रूप से पूजाकिया करता था. मान्यता है कि उसकी इस श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर नाग देवता उसे प्रतिदिन दर्शन दिया करते थे. मान्यता है किकई बार मंदिर में पूजा के दौरान नाग उस शिवभक्त के पैरों पर लिपट जाया करते थे, लेकिन नाग देवता की कृपा से उसे कभी कुछ भीनुकसान नहीं पहुंचाते थे।

तब बहन ने नाग को मार डाला

मान्यता है कि एक दिन जब महादेव शिवालय में नाग देवता की पूजा में ध्यान मग्न था तो हमेशा की तरह एक नाग उसके पैरों में आकरलिपट गया, उसी समय उसकी बहन वहां पर पहुंच गई। नाग को अपने भाई के पैरों में लिपटा देखकर वह डर गई। जब उसे इस बात काभय हुआ कि वह नाग उसके भाई को काट सकता है तो उसने एक डंडा उठाकर उस नाग को पीटपीट कर मार डाला. इसके बाद जबमहादेव का ध्यान टूटा तो उसने अपने सामने नाग को मरा पाया।

नाग पंचमी पर इसलिए पीटते हैं गुड़िया

बहन के द्वारा नाग के मारे जाने से भाई को बहुत गुस्सा आया और जब उसने इसका कारण अपनी बहन से पूछा तो बहन से सच्चाई बतादी. इस पर महादेव ने अपने बहन से कहा कि तुमने नाग देवता को मारा है लेकिन इसका दंड तुम्हें जरूर मिलेगा. चूंकि बहन ने अनजाने मेंनाग को मारा था इसलिए उस दिन प्रतीकात्मक सजा के तौर पर कपड़े से बनी गुड़िया को पीटा गया, तब से लेकर आज तक नाग पंचमीके दिन गुड़िया को पीटने की परंपरा चली रही है।

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