बिजली विभाग की खौफनाक लापरवाही: बगल में नया पोल, फिर भी टूटे खंभे से मौत की सप्लाई!
CM-ऊर्जा मंत्री के घर से 35 KM दूर अफसरों की गुंडागर्दी! डेढ़ महीने से टूटे पोल पर झूल रहे हाईटेंशन तार; क्या किसी मासूम की जान लेकर जागेगा सिस्टम?

पंकज सिंह चौहान/करण वाणी, न्यूज़
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी और मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री के आवास से महज 35 किलोमीटर की दूरी पर बिजली विभाग की एक ऐसी खौफनाक लापरवाही सामने आई है, जो कभी भी एक बड़े खूनी हादसे में बदल सकती है। मामला लखनऊ के बनी पावर हाउस के अंतर्गत आने वाले कटी बगिया क्षेत्र का है। यहाँ एक विद्युत पोल पिछले करीब डेढ़ महीने से नीचे से पूरी तरह टूट कर मलबे और चंद कटी हुई सरियों के भरोसे हवा में लहरा रहा है।
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि खंभे का निचला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो चुका है। यह भारी-भरकम पोल कभी भी पास की ऊंची इमारत, सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों या वहाँ से गुजरने वाले मासूम राहगीरों पर गिर सकता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह खंभा एक ‘लाइव टाइम बम’ की तरह है, जिसके साये में लोग रोज़ अपनी जान हथेली पर रखकर जीने को मजबूर हैं।
नया खंभा गाड़ा, पर तार बदलना भूले ‘लापरवाह’ अफसर
इस पूरे मामले में बिजली विभाग की कार्यशैली और भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ा सवालिया निशान खड़ा होता है। विभाग को इस खतरे की भनक तो लगी, जिसके बाद आज से करीब 20 दिन पहले इस टूटे पोल के ठीक बगल में एक नया खंभा गाड़ भी दिया गया। लेकिन “काम आधा करके” वाहवाही लूटने की आदत से मजबूर बिजली विभाग ने नए खंभे पर चालू हाईटेंशन तारों को शिफ्ट करने की जहमत ही नहीं उठाई।
आज भी चालू बिजली के खतरनाक तार उसी टूटे और जर्जर हो चुके खंभे पर लटके हुए हैं। ऐसे में नया खंभा सिर्फ एक शो-पीस बनकर खड़ा है और जनता का मौत से सामना जस का तस बना हुआ है।
‘कल ठीक हो जाएगा’— जेई साहब का 15 दिन पुराना वो ‘झूठा’ आश्वासन, पत्रकार के प्रयास को भी ठेंगा!
बिजली विभाग की इस तानाशाही और लापरवाही की हद तो तब पार हो गई जब एक जिम्मेदार पत्रकार ने आज से करीब 15 दिन पहले क्षेत्र के संबंधित जेई (Junior Engineer) से फोन पर सीधे वार्ता की। उन्हें इस जानलेवा खतरे से अवगत कराते हुए जनहित में खंभे को तुरंत ठीक करने का अनुरोध किया था।
तब जेई साहब ने फोन पर बड़े आराम से टरकाते हुए आश्वासन दिया था कि— “चिंता मत करिए, दूसरे ही दिन इस खंभे को पूरी तरह ठीक कर दिया जाएगा और तार शिफ्ट हो जाएंगे।” लेकिन अफ़सोस, साहब का वह ‘कल’ आज 15 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं आया। एक पत्रकार द्वारा धरातल की हकीकत दिखाने और सीधे टोकने के बाद भी अगर काम नहीं हुआ, तो यह साफ तौर पर साबित करता है कि स्थानीय अफसरों को न तो जनता की जान की परवाह है और न ही अपनी जिम्मेदारी का कोई अहसास। अधिकारियों के लिए यह सिर्फ एक फोन कॉल और एक ‘कोरा आश्वासन’ रहा होगा, लेकिन स्थानीय जनता यहाँ हर सेकंड अपनी जिंदगी दांव पर लगा रही है।
VIP क्षेत्र से महज 35 KM दूर अधिकारियों की खुली मनमानी
राजधानी में बैठकर 24 घंटे बिजली और दुरुस्त व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करने वाले आला अधिकारियों और खुद ऊर्जा मंत्री की साख को कटी बगिया का यह खंभा सरेआम ठेंगा दिखा रहा है। वीआईपी दफ्तरों से महज 30-35 किलोमीटर की दूरी पर बैठे अफसरों की यह सुस्ती और मनमानी साफ दर्शाती है कि सिस्टम पूरी तरह से बेलगाम हो चुका है। सड़क पर हर वक्त गाड़ियों की भारी आवाजाही रहती है, पास में रिहायशी इलाका है, लेकिन विभाग शायद किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।



