लखनऊ

आर्थिक तंगी से अंधेरे में थे बुजुर्ग, VAGA Hospital और डॉ. पल्लवी सिंह ने मुफ्त इलाज कर लौटाई आंखों की रोशनी

"आर्थिक अभाव में इलाज को तरस रहे बुजुर्ग के लिए मसीहा बनीं डॉ. पल्लवी सिंह, सफल ऑपरेशन से दूर किया आँखों का अंधेरा"

पंकज सिंह चौहान/करण वाणी,न्यूज

लखनऊ। चिकित्सा के पेशे को ‘नोबल प्रोफेशन’ क्यों कहा जाता है, इसकी एक जीवंत तस्वीर राजधानी लखनऊ में देखने को मिली। जहाँ एक तरफ प्राइवेट अस्पतालों पर आए दिन भारी-भरकम बिल वसूलने के आरोप लगते हैं, वहीं लखनऊ के VAGA Hospitalऔर डॉ. पल्लवी सिंह ने एक बेसहारा बुजुर्ग की आंखों की रोशनी लौटाकर यह साबित कर दिया कि “डॉक्टर होना सिर्फ इलाज करना नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी में उजाला लाना है।”

अंधेरे में गुम थी जिंदगी, टीम की नजर ने बदला भाग्य

घटना की शुरुआत तब हुई जब डॉ. पल्लवी सिंह की टीम के सदस्य मार्केटिंग के दौरान लखनऊ की गलियों में थे। वहाँ उनकी नजर एक ऐसे बुजुर्ग पर पड़ी जो अकेले, शांत और बेबसी के अंधेरे में बैठे थे। बातचीत करने पर पता चला कि बुजुर्ग की दोनों आंखों में पका हुआ मोतियाबिंद (Mature Cataract) था, जिसकी वजह से उन्हें दिखना लगभग बंद हो गया था।

दुखद पहलू यह था कि आर्थिक तंगी के कारण उनके परिवार के सदस्य भी इलाज कराने में असमर्थ थे और बुजुर्ग लगभग पूरी तरह दृष्टिहीनता की स्थिति में पहुंच चुके थे।

“पैसों की वजह से नहीं रुकेगी रोशनी”

जैसे ही यह मामला अस्पताल प्रबंधन और डॉ. पल्लवी सिंह के संज्ञान में आया, उन्होंने बिना देरी किए एक बड़ा फैसला लिया। डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि आर्थिक स्थिति किसी के इलाज में बाधा नहीं बननी चाहिए।

“हमने उसी क्षण फैसला किया कि इन बुजुर्ग की आंखों की रोशनी पैसों की वजह से नहीं रुकनी चाहिए। VAGA Hospital में उनकी मोतियाबिंद सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क (Free of Cost) करने का निर्णय लिया गया।” — डॉ. पल्लवी सिंह

ऑपरेशन के बाद झलकी खुशी की चमक

सफल सर्जरी के बाद जब बुजुर्ग की आंखों से पट्टी हटाई गई और उन्होंने लंबे समय बाद इस दुनिया को स्पष्ट देखा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। बुजुर्ग ने हाथ जोड़कर अपनी खुशी और आशीर्वाद व्यक्त किया।

डॉ. पल्लवी ने इस अनुभव को साझा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि जब किसी की आंखों में रोशनी लौटती है, तो डॉक्टर के मन में भी गहरा सुकून भर जाता है।

निजी अस्पतालों के लिए एक संदेश

आज के दौर में जहाँ स्वास्थ्य सेवा एक बड़ा उद्योग बन चुकी है, डॉ. पल्लवी सिंह और उनकी टीम का यह सेवा भाव अन्य निजी संस्थानों के लिए एक प्रेरणा है। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि चिकित्सा का असली उद्देश्य मुनाफा नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुँचाना है।

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