लखनऊ

अब सरोजनीनगर में सिर्फ वही टिकेगा, जो बच्चों की फीस बिजली बिल और जस्टिन बीबर को बुलाने की ‘गारंटी कार्ड’ बांटेगा!

सरोजनीनगर का 'हाई-वोल्टेज' सेवा मॉडल: विपक्षी उम्मीदवार अब घोषणापत्र नहीं, अपना 'बजट' और 'कनेक्शन' चेक करें!

विशेष रिपोर्ट/पंकज सिंह चौहान 

लखनऊ | राजनीति में अक्सर ‘वादाखिलाफी’ की खबरें हेडलाइन बनती हैं, लेकिन लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा में कहानी कुछ उलट नजर आ रही है। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जिस तरह से व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं के समाधान का ‘बीड़ा’ उठाया है, वह अब चर्चा का विषय कम और अध्ययन का विषय ज्यादा बन गया है।

पत्रकारिता की दृष्टि से देखें तो क्षेत्र में एक अजीब सी निर्भरता पैदा होती दिख रही है। बिजली का बिल बकाया होने पर घर का अंधेरा दूर करना हो, बीमार के लिए अस्पताल की चौखट आसान करनी हो, या बुजुर्गों को अयोध्या की ‘भक्ति यात्रा’ पर भेजना हो—विधायक जी का दखल हर जगह मौजूद है। राशन से लेकर लैपटॉप, सिलाई मशीन से लेकर दिव्यांगों के लिए ट्राइसाइकिल तक, सरकारी तंत्र से इतर विधायक निधि और व्यक्तिगत प्रयासों का यह ‘वितरण मॉडल’ जनता को राहत तो दे रहा है, लेकिन विपक्ष के लिए ‘सियासी स्पेस’ खत्म करता जा रहा है।

एक पत्रकार के तौर पर चुनावी विश्लेषण करें तो अब सरोजनीनगर से चुनाव लड़ना किसी ‘असंभव मिशन’ जैसा लग रहा है। अब अगर किसी को डॉ. राजेश्वर सिंह के सामने चुनावी ताल ठोकनी है, तो उसे सिर्फ भाषण से काम नहीं चलेगा, उसे अपना ‘बजट’ और ‘कनेक्शन’ राजेश्वर जी के लेवल पर लाना होगा। और विपक्षी उम्मीदवार को अब ये ‘योग्यताएं’ दिखानी होंगी

 

• विधायक जी बिजली का बिल भर रहे हैं, तो विपक्षी को अब बच्चों की स्कूल फीस और कोचिंग का खर्च भी अपनी जेब से भरने का ‘गारंटी कार्ड’ बांटना होगा।

• अगर विधायक जी हनी सिंह का जलवा और संजय दत्त की ‘जादू की झप्पी’ ला सकते हैं, तो सामने वाले को कम से कम जस्टिन बीबर को सरोजनीनगर की गलियों में लाइव शो के लिए बुलाने का दमखम रखना होगा। 🎤

• विधायक जी पूरी की पूरी मूवी दिखा देते हैं, तो विपक्षी को शायद हर वार्ड में नोरा फतेही के डांस का इंतजाम करना पड़े, तब जाकर जनता शायद ‘नमस्ते’ कहेगी!

व्यंग्य के लहजे में कहें तो, डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनीनगर की जनता की ‘आदत’ बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब अगर किसी को इनके सामने ‘दुखड़ा’ रोना हो, तो उसे पहले अपनी लिस्ट चेक करनी पड़ती है, क्योंकि बुनियादी जरूरतों की पूर्ति की गारंटी तो विधायक जी ने पहले ही दे रखी है।

साफ है कि सरोजनीनगर में अब चुनाव ‘सियासी’ कम और ‘सर्विस ओरिएंटेड’ ज्यादा हो गया है। बेचारा विपक्ष अब इस बात से परेशान है कि वह मुद्दा क्या बनाए? क्योंकि जो मुद्दा पैदा होता है, विधायक जी उसका ‘इलाज’ तुरंत कर देते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई ऐसा ‘जादूगर’ मैदान में आता है जो इस ‘ऑल-इन-वन’ मॉडल को चुनौती दे सके!

 

(यह लेख सरोजनीनगर की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और विधायक की कार्यशैली पर एक व्यंग्यात्मक (Sarcastic) विश्लेषण है। उद्देश्य क्षेत्र की चुनावी चुनौतियों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करना है।)

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