खत्म होगा भूभक्षक वक्फ का रक्तबीज, पारदर्शिता की नई सुबह: डॉ. राजेश्वर सिंह
डॉक्टर राजेश्वर सिंह ने कहा कि सपा के समर्थन से कांग्रेस ने खड़ा किया था वक्फ रुपी अतिक्रमणकारी, अनियंत्रित तानाशाह, 'वक्फ बोर्ड अधिनियम -1995' देश के अन्दर ही एक और 'पकिस्तान' बनाने की कांग्रेसी रणनीति

वक्फ बोर्ड संशोधन बिल – एक ऐतिहासिक कदम की ओर मोदी सरकार, वक्फ बोर्ड की तानाशाही पर लगाम, समावेशी भविष्य हो रही शुरुआत: डॉ. राजेश्वर सिंह
लखनऊ। बुधवार को संसद में वक्फ संशोधन बिल पेश हुआ। लोक सभा में जारी चर्चा के बीच सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा यह अधिनियम कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा बनाए गए तुष्टिकरण के उस काले अध्याय को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिसने वक्फ बोर्ड को एक अनियंत्रित तानाशाह और भूभक्षक के रूप में स्थापित कर दिया था। सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने इसे “समाजवादी पार्टी के समर्थन से रचित वक्फ अधिनियम, 1995 की पराकाष्ठा” करार देते हुए कहा कि यह देश के भीतर एक “दूसरा पाकिस्तान” बनाने की साजिश थी, जो काफी हद तक सफल भी हुई।
विधायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए। विधायक ने लिखा वक्फ बोर्ड के पास आज 9.4 लाख एकड़ भूमि, 8.72 लाख अचल संपत्तियाँ, 16 हजार चल संपत्तियाँ और 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियाँ हैं। रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद यह भारत की सबसे बड़ी भूमि नियंत्रक संस्था बन चुकी है। लेकिन अब समय बदलाव का है। यह संशोधन बिल वक्फ बोर्ड की असीमित शक्तियों पर लगाम लगाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संपत्ति विवादों को सुलझाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
संशोधन बिल के प्रमुख बदलाव:
1. पारदर्शिता की गारंटी: सभी वक्फ संपत्तियों का छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य। CAG या सरकारी ऑडिटर द्वारा संपत्तियों की जाँच। जिला कलेक्टर को सर्वे का अधिकार, सरकारी संपत्तियों पर वक्फ का दावा खत्म। “वक्फ बाय यूजर” जैसे अस्पष्ट दावों पर रोक।
2. विवादों का सरल समाधान:
धारा 40 का खात्मा, जिसके तहत बोर्ड किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित कर सकता था। ट्रिब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का प्रावधान। सरकारी संपत्तियों को वक्फ से मुक्त करने की व्यवस्था।
3. समावेशी संरचना:
बोर्ड में दो महिला और दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति। शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी और पिछड़े मुस्लिम वर्गों का प्रतिनिधित्व। बोहरा और आगाखानी समुदायों के लिए अलग बोर्ड की संभावना।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने इसे “आधुनिक, पारदर्शी और समावेशी” बनाने वाला कदम बताते हुए कहा कि यह बिल वक्फ बोर्ड के दुरुपयोग को रोकेगा और समाज के हर वर्ग को न्याय दिलाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस पहल के लिए अभिनंदन दिया।
विधायक ने अंत में लिखा यह बिल न केवल एक कानूनी सुधार है, बल्कि दशकों से चली आ रही उस व्यवस्था का अंत है, जो अतिक्रमण और अनियंत्रित शक्ति का पर्याय बन चुकी थी। आज का दिन न सिर्फ वक्फ बोर्ड के सुधार का, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत का प्रतीक है।