लखनऊ

अवध कॉलेजिएट स्कूल की मनमानी, एडवांस फ़ीस के लिए अभिभावकों को कर रहे मानसिक प्रताड़ित

अवध कॉलेजिएट स्कूल की मनमानी से अभिभावक परेशान है, एडवांस फ़ीस न जमा करने पर स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावकों को डिफॉल्टर घोषित करने की धमकी दी जा रही है। वहीं मार्च की फ़ीस नवंबर में ही जमा कराने को अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है, जो अभिभावक एडवांस फ़ीस जमा करने में असमर्थ हैं उनको स्कूल प्रशासन द्वारा रोज़ रोज़ फ़ोन करके मानसिक प्रताड़ित किया जा रहा है।

एक दिन फ़ीस जमा करने में देरी हुई तो लगेगा 500 रुपये का जुर्माना

लखनऊ। अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने को विवश हैं। यहां उनका जमकर आर्थिक दोहन होता है। प्रवेश शुल्क से किस्सा शुरू होता है जो मासिक शुल्क वार्षिक शुल्क खेलकूद शुल्क वाहन शुल्क पिकनिक शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शुल्क अभिभावक संगोष्ठी विज्ञान प्रदर्शनी सहित जाने कितने शुल्क पर जाकर ठहरता है।

सरकारी स्कूलों में पठन पाठन के स्तर को बेहतर बनाने के तमाम प्रयास लक्ष्य से दूर नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने को विवश हैं। यहां उनका जमकर आर्थिक दोहन होता है। प्रवेश शुल्क से किस्सा शुरू होता है जो मासिक शुल्क, वार्षिक शुल्क, खेलकूद शुल्क, वाहन शुल्क, पिकनिक शुल्क, स्वास्थ्य परीक्षण शुल्क, अभिभावक संगोष्ठी, विज्ञान प्रदर्शनी सहित जाने कितने शुल्क पर जाकर ठहरता है। इसमें सबसे अधिक परेशानी मध्यम वर्गीय अभिभावकों को होती है।

समय समय पर अभिभावक इसे लेकर विरोध भी जताते हैं लेकिन सुनवाई नहीं होती है। स्कूल प्रबंधनों और स्थानीय प्रशासन को भी इन सभी चीजों को लेकर कुछ बदलाव करने की जरूरत है। सरकारी स्कूलों को स्तरीय बनाने के साथ प्राइवेट स्कूलों में भी सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराना समय की मांग है।

वर्जन अभिभावक

  • मेरा बालक अवध कॉलेजिएट दरोग़ा खेड़ा स्कूल में पढ़ता है। प्रत्येक महीने एडवांस फीस देनी पड़ती है। गर्मी की छुट्टी हो या सर्दी की, फीस हर हाल में पूरी जमा करनी पड़ती है। वाहन में निर्धारित संख्या से अधिक बच्चे भी बैठाए जाते हैं। अब तो ये आलम है कि मार्च की फ़ीस नवंबर में ही वसूल रहे हैं अगर फ़ीस एडवांस न जमा किया तो स्कूल से डिफाल्टर घोषित करने के मैसेज जाते हैं, और क्लास टीचर रोज़ फ़ोन करके मानसिक रूप से प्रताड़ित करती हैं ।

      कमलेश सिंह

  • मेरे बच्चे अवध कॉलेजिएट दरोग़ा खेड़ा स्कूल में पढ़ते हैं, विद्यालय द्वारा मोटी फ़ीस वसूली जाती है, मेंटीनेंस के नाम पर 3500 रुपये हर साल वसूलते हैं, विद्यालय से ही कापी, किताब, यूनिफार्म, जूता मोजा आदि ख़रीदने को मजबूर करते हैं। अगर फ़ीस जमा करने में एक दिन लेट हुआ तो 500 रुपये का जुर्माना देना पड़ता है, विद्यालय में बच्चों के प्रवेश व पुस्तकों ने कमर तोड़ दिया है। वहीं जिम्मेदार आंख बंद कर तमाशा देख रहे हैं।

       अखिलेश सिंह

Spread the love

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button