सेहत

नाइट ब्लड सैंपल सर्वे कर खोजे जा रहे फाइलेरिया रोगी, लगभग 300 लोगों के लिए सैंपल

सरोजनीनगर पीएचसी द्वारा डॉ. नीरज गुप्ता व वरिष्ठ निरीक्षक ए.के सिंह की देख-रेख में पहाड़पुर गाँव में 8,9 व 11 तारीख़ को लगाया गया फाइलेरिया जांच का कैंप।

पंकज सिंह चौहान/करण वाणी 

लखनऊ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी लखनऊ के निर्देशों पर पीएचसी सरोजनीनगर के द्वारा डॉक्टर नीरज गुप्ता व वरिष्ठ निरीक्षक एके सिंह की देख-रेख में पहाड़पुर गाँव में फाइलेरिया जांच का कैंप लगाया गया। जिसमें लगभग 300 लोगों के सैंपल लिए गए।

डॉ नीरज गुप्ता ने कहा कि फाइलेरिया से बचाव किया जाना जरूरी है फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग गंभीर है और इसे सुनिश्चित करने को लेकर तमाम गतिविधियों का आयोजन कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया, रात के 08 बजे से 12 बजे के बीच इस बीमारी की जांच करने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। दरअसल, इस दौरान इसके कीटाणु सक्रिय होते है। इसी उद्देश्य से नाइट ब्लड सर्वे किया जा रहा है।

वरिष्ठ निरीक्षक एके सिंह ने कहा कि शरीर को पूरी तरह से अस्वस्थ बनाने वाला रोग जिसे फाइलेरिया या हाथीपांव के नाम से हम जानते हैं, यह परजीवी के माध्यम से फैलने वाला रोग है, इस रोग से अन्य लोग प्रभावित न हो सके इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने नाइट ब्लड सर्वे का मुहिम छेड़ा है, चुकी यह रात 8 बजे के बाद ही प्रभावित होता है तो इस सर्वे के माध्यम से प्रशिक्षित टीम तुरंत उपचार कर भविष्य में फाइलेरिया को समाप्त करने का प्रयास कर रही है।

मच्छर से फैलने वाले इस रोग की पहचान-

रात 8 बजे से शुरू होकर देर रात तक चलने वाली इस सैंपलिंग में महिलाओं और पुरुषों दोनों का ब्लड सैंपल लिया गया। रक्त पट्टिका का निर्माण कर फाइलेरिया रोगी मिलने पर उनका निशुल्क इलाज मुहैया कराया जाएगा। फाइलेरिया, जिसे सामान्यत हाथीपांव के नाम से जाना जाता है, मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।

गांव में डेंगू और बुखार का कहर, दो लोगों की हो चुकी हैं मौत

वायरल बुखार के साथ डेंगू का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। सरोजनी नगर क्षेत्र के गांव पहाड़पुर में सैकड़ों लोग बीमार है।इनमें 25 से अधिक लोग अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती कराए गए हैं। गांव में बुखार और डेंगू के चलते 20 दिन में दो लोगों की मौत हो चुकी है।

मौसम बदलते ही डेंगू और मलेरिया का प्रकोप शुरू हो गया था। स्वास्थ्य विभाग कागजों में अभियान चलाकर खानापूर्ति में जुटा है। मुख्यमंत्री आवास के क़रीब 25 किलोमीटर दूर बसे पहाड़पुर गाँव में घर-घर लोग बुखार, डेंगू और मलेरिया से जूझ रहे हैं। लोग गावों में बैठे झोलाछापों से इलाज करवा रहे हैं। सुधार न होने पर निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही हैं।

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